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गांधी टॉक्स एक भारतीय फिल्म है जिसका निर्देशन किशोर पांडुरंग बेलेकर ने किया है और इसका निर्माण ज़ी स्टूडियोज़, क्योरियस, पिनकमून मेटा स्टूडियोज़ और मूवीमिल ने किया है। इस फिल्म में कोई संवाद नहीं है और इसमें विजय सेतुपति, अरविंद स्वामी, अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ जाधव ने अभिनय किया है।
फिल्म का विवरण
‘गांधी टॉक्स’ एक बहुत ही खास फिल्म है जिसकी अवधि 2 घंटे और 10 मिनट है। इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से एक मूक फिल्म (silent film) है।
फिल्म की खासियतें:
कोई संवाद नहीं: फिल्म में न तो कोई बोल-चाल है और न ही किरदारों की आवाज़।
मौन का महत्व: पूरी फिल्म में एक गहरी शांति बनी रहती है, जो दर्शकों को कहानी से अलग तरह से जोड़ती है।
सिर्फ भावनाएँ: शब्दों की जगह यहाँ केवल कलाकारों के चेहरे के हाव-भाव (emotions) और उनकी एक्टिंग ही पूरी कहानी बयां करती है।
यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कहा जा सकता है।

फिल्म का मुख्य विषय
फिल्म का नाम महात्मा गांधी के सिद्धांतों और भारतीय नोटों पर छपी उनकी तस्वीर से प्रेरित है। यह फिल्म आज के जमाने के लालच, भ्रष्टाचार और नैतिकता के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। फिल्म यह दिखाती है कि कैसे ‘गांधीजी’ (पैसा) आज की दुनिया में लोगों की सोच और उनके व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
कहानी के मुख्य बिंदु
किरदार और संघर्ष: फिल्म के केंद्र में चार मुख्य पात्र हैं। विजय सेतुपति का किरदार एक ऐसे युवक का है जो अपनी जरूरतों और सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। उसे लगता है कि पैसा ही उसकी हर समस्या का समाधान है।
पैसे की दौड़: कहानी तब आगे बढ़ती है जब ये चारों पात्र एक-दूसरे के आमने-सामने आते हैं। हर कोई अपने फायदे के लिए ‘गांधी’ (करेंसी नोटों) के पीछे भाग रहा है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक आम इंसान पैसों के लिए अपनी ईमानदारी को दांव पर लगा देता है।
गांधीवादी सिद्धांतों का चित्रण: हालांकि फिल्म चुप है, लेकिन यह प्रतीकों (Symbols) के माध्यम से बात करती है। फिल्म गांधीजी के तीन बंदरों (बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो) के विचार को आधुनिक संदर्भ में तोड़ती-मरोड़ती है और एक व्यंग्य (Satire) पेश करती है।
क्लाइमेक्स: अंत में, फिल्म यह संदेश देती है कि पैसा भले ही दुनिया चलाता हो, लेकिन वह सुकून या चरित्र नहीं खरीद सकता।
फिल्म की खास बातें
कलाकार: इसमें विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी, अरविंद स्वामी और सिद्धार्थ जाधव मुख्य भूमिकाओं में हैं।
संगीत: चूंकि फिल्म में संवाद नहीं हैं, इसलिए इसका बैकग्राउंड म्यूजिक बहुत महत्वपूर्ण है, जिसे दिग्गज संगीतकार ए.आर. रहमान ने तैयार किया है। संगीत ही फिल्म की भावनाओं और कहानी को दर्शकों तक पहुँचाता है।
“गांधी टॉक्स” केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक सामाजिक टिप्पणी है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में गांधीजी के बताए रास्ते पर चल रहे हैं या सिर्फ उनके नोटों के पीछे भाग रहे हैं।




