Holi vs Lunar Eclipse , होली के दिन ग्रहण का साया, भूलकर भी न करें ये गलतियां।
3 मार्च 2026, एक बहुत ही महत्वपूर्ण खगोलीय घटना हो रही है। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) लग रहा है। यह इस साल का पहला चंद्र ग्रहण है।
यहाँ इस ग्रहण से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है:
1. क्या यह भारत में दिखाई देगा?
हाँ, सबसे अच्छी खबर यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत के पश्चिमी हिस्सों में यह चंद्रमा के अस्त होने के समय (Moonset) लगेगा, इसलिए वहाँ यह केवल आंशिक रूप से या “पेनुमब्रल” (उपछाया) के रूप में ही दिख पाएगा। पूर्वी भारत में यह बेहतर तरीके से दिखाई देगा।
2. ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार – IST)
चंद्र ग्रहण की प्रक्रिया दोपहर से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन मुख्य दृश्य शाम को दिखेगा:
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ग्रहण की शुरुआत (Penumbral Phase): दोपहर लगभग 2:12 PM से।
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पूर्ण ग्रहण का आरंभ (Totality Starts): शाम लगभग 4:28 PM से।
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अधिकतम ग्रहण (Maximum Eclipse): शाम 5:03 PM बजे, जब चंद्रमा पूरी तरह से लाल (Blood Moon) दिखाई देगा।
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पूर्ण ग्रहण की समाप्ति: शाम लगभग 5:38 PM पर।
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ग्रहण का पूरा अंत: शाम 7:53 PM पर।
नोट: क्योंकि भारत में चंद्रमा शाम को उदय (Moonrise) होता है, इसलिए हम ग्रहण का केवल अंतिम हिस्सा ही देख पाएंगे जब चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आएगा।
3. ‘ब्लड मून’ क्यों कहते हैं?
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान, पृथ्वी की छाया चंद्रमा को पूरी तरह ढक लेती है। लेकिन सूर्य की कुछ रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर चंद्रमा तक पहुँचती है। वायुमंडल नीले रंग को सोख लेता है और केवल लाल रंग को आगे जाने देता है, जिससे चंद्रमा गहरा लाल या तांबे के रंग का दिखने लगता है।
4. क्या सूतक काल मान्य है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।
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चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान है, इसलिए कई लोग सूतक के नियमों (जैसे पूजा-पाठ न करना या भोजन के संबंध में सावधानी) का पालन करेंगे।
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होलिका दहन और सूतक का समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। चूंकि आज ग्रहण दोपहर लगभग 2:12 PM पर शुरू हो रहा है, इसलिए इसका सूतक सुबह से ही प्रभावी हो गया है।
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प्रभाव: आमतौर पर सूतक काल में शुभ कार्य और पूजा-पाठ वर्जित होते हैं।
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होलिका दहन: अच्छी बात यह है कि ग्रहण शाम 7:53 PM तक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसलिए, होलिका दहन ग्रहण की समाप्ति और शुद्धि (स्नान-दान) के बाद ही किया जाना चाहिए।
2. पूजा और अनुष्ठान पर प्रभाव
ग्रहण के कारण इस बार होली की पूजा के नियमों में कुछ बदलाव रहेंगे:
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मंदिरों के कपाट: सूतक लगने के कारण दिन में कई मंदिरों के कपाट बंद रह सकते हैं।
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भोजन: सूतक काल में भोजन बनाने और खाने से परहेज किया जाता है, हालांकि बीमारों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए छूट होती है। लोग खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते (कुश) डालते हैं।
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दान का महत्व: ग्रहण के बाद और होली के अवसर पर सफेद वस्तुओं (चावल, चीनी, दूध) का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
3. राशियों पर संभावित प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह ग्रहण कन्या या मीन राशि (खगोलीय गणना के आधार पर) में लग रहा है, जिसका सभी राशियों पर अलग-अलग असर हो सकता है:
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सकारात्मक: वृषभ, कर्क और वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय नए अवसर ला सकता है।
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सावधानी: मेष, कन्या और मीन राशि वालों को अपनी सेहत और वाद-विवाद से बचने की सलाह दी जाती है।
4. क्या रंगों वाली होली (धुलेंडी) पर असर होगा?
नहीं, रंगों वाली होली कल यानी 4 मार्च को मनाई जाएगी। तब तक ग्रहण का प्रभाव पूरी तरह खत्म हो चुका होगा। इसलिए आप कल बिना किसी चिंता या बाधा के पूरे उत्साह के साथ होली खेल सकते हैं।
विशेष टिप: ग्रहण खत्म होने के बाद (रात 7:53 PM के बाद) घर में गंगाजल छिड़कें, स्नान करें और फिर होलिका दहन की पूजा में शामिल हों। इससे ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाता है।
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ग्रहण देखने के लिए टिप्स:
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आंखों की सुरक्षा: सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को आप अपनी नग्न आंखों से सुरक्षित रूप से देख सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष फिल्टर या चश्मे की जरूरत नहीं होती।
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स्थान: ऐसी जगह चुनें जहाँ से पूर्वी क्षितिज (East Horizon) साफ दिखाई दे।
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