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Mahashivratri 2026: इस बार क्यों है यह महापर्व बेहद खास?

Mahashivratri 2026: इस बार क्यों है यह महापर्व बेहद खास?

महाशिवरात्रि केवल एक व्रत या त्योहार नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के मिलन का प्रतीक है। इस वर्ष की महाशिवरात्रि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आ रही है।

1. दुर्लभ ‘सर्वार्थ सिद्धि’ और ‘शिव योग’

इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा और शुरू किए गए कार्य निश्चित ही सफल होते हैं। साथ ही, ‘शिव योग’ का होना सोने पर सुहागा है, जो साधकों की एकाग्रता और भक्ति को बढ़ाता है।

2. ग्रहों की विशेष स्थिति

2026 में महाशिवरात्रि के समय ग्रहों का गोचर कुछ इस प्रकार है कि चंद्रमा अपनी उच्च स्थिति के करीब होगा, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करना आसान होगा। शनि और सूर्य की विशेष युति भी इस समय को कर्मों के फल प्राप्ति के लिए अनुकूल बना रही है।

3. साधना के लिए श्रेष्ठ समय

महाशिवरात्रि की रात को ‘कालरात्रि’ भी कहा जाता है। इस बार रात के चारों प्रहर की पूजा का समय बहुत ही सटीक बैठ रहा है। जो लोग मंत्र दीक्षा लेना चाहते हैं या ध्यान (Meditation) की गहराई में उतरना चाहते हैं, उनके लिए यह समय “कॉस्मिक एनर्जी” से जुड़ने का सबसे अच्छा अवसर है।

4. प्रकृति और अध्यात्म का मिलन

फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह रात सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का संकेत देती है। इस बार पर्यावरण में आने वाला बदलाव शरीर के चक्रों को जागृत करने में सहायक सिद्ध होगा।


महाशिवरात्रि पूजा का महत्व

  • अभिषेक: दूध, गंगाजल और शहद से शिवलिंग का अभिषेक करना मन की शुद्धि का प्रतीक है।

  • बेलपत्र: ‘त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च’—तीन गुणों वाले बेलपत्र चढ़ाने से तामसी प्रवृत्तियों का नाश होता है।

  • जागरण: इस रात जागकर शिव नाम का संकीर्तन करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है।

विशेष टिप: यदि आप इस दिन उपवास रख रहे हैं, तो केवल फलहार लें और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर ध्यान करने का प्रयास करें। यह ऊर्जा के प्रवाह में मदद करता है।


इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जा रही है। शिव पूजा के लिए “निशिता काल” (आधी रात का समय) सबसे महत्वपूर्ण होता है।

प्रमुख समय:

आयोजन समय
निशिता काल पूजा समय रात 12:09 AM से 01:00 AM (16 फरवरी)
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 15 फरवरी को सुबह 08:15 AM से
चतुर्दशी तिथि समाप्त 16 फरवरी को सुबह 06:40 AM तक
व्रत पारण समय 16 फरवरी को सुबह 06:41 AM के बाद

चार प्रहर की पूजा का समय (15-16 फरवरी):

  • प्रथम प्रहर: शाम 06:10 PM से रात 09:24 PM

  • द्वितीय प्रहर: रात 09:24 PM से रात 12:38 AM

  • तृतीय प्रहर: रात 12:38 AM से तड़के 03:51 AM

  • चतुर्थ प्रहर: सुबह 03:51 AM से सुबह 07:05 AM


🕯️ महाशिवरात्रि पूजा विधि

महाशिवरात्रि की पूजा यदि विधि-विधान से की जाए, तो इसका फल अनंत गुना बढ़ जाता है:

  1. शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ (हो सके तो सफेद या केसरिया) वस्त्र धारण करें।

  2. संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें कि आप पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना करेंगे।

  3. पंचामृत स्नान: शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाएं, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें। अंत में शुद्ध गंगाजल अर्पित करें।

  4. विशेष सामग्री:

    • बेलपत्र: कम से कम 3 या 11 बेलपत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ जपते हुए चढ़ाएं (ध्यान रहे बेलपत्र कटा-फटा न हो)।

    • धतूरा और भांग: ये शिवजी को अत्यंत प्रिय हैं और वैराग्य का प्रतीक हैं।

    • अक्षत और चंदन: बिना टूटे हुए चावल और सफेद चंदन का तिलक लगाएं।

  5. धूप-दीप: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती/धूप से वातावरण को सुगंधित करें।

  6. भोग: ऋतु फल (जैसे बेर, केला) या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।

  7. आरती और क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में शिव आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।

सफलता के लिए विशेष मंत्र

पूजा के दौरान इस मंत्र का निरंतर मानसिक जाप करें:

“कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥”

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