Aapda Mitra Scheme 2026 , NDMA , क्या आपदा मित्र को सैलरी मिलती है? जानें सरकार की नई गाइडलाइन्स।
Aapda Mitra Scheme 2026 , NDMA , क्या आपदा मित्र को सैलरी मिलती है? जानें सरकार की नई गाइडलाइन्स।
आपदा मित्र (Aapda Mitra) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आपदाओं के समय स्थानीय स्तर पर त्वरित सहायता पहुँचाना है।

1. क्या है ‘आपदा मित्र’?
‘आपदा मित्र’ का अर्थ है “आपदा में सहायक मित्र”। यह योजना समुदाय-आधारित स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए बनाई गई है। जब भी कोई प्राकृतिक आपदा (जैसे बाढ़, भूकंप या चक्रवात) आती है, तो सरकारी मदद पहुँचने में कुछ समय लग सकता है। ऐसे में प्रशिक्षित स्थानीय स्वयंसेवक सबसे पहले प्रतिक्रिया देते हैं और लोगों की जान बचाते हैं।
2. मुख्य उद्देश्य
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त्वरित प्रतिक्रिया: आपदा के शुरुआती “गोल्डन आवर्स” (शुरुआती समय) में राहत कार्य शुरू करना।
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स्थानीय सशक्तिकरण: गाँव और ब्लॉक स्तर के लोगों को इस काबिल बनाना कि वे आपदा का सामना कर सकें।
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जीवन और संपत्ति की सुरक्षा: पेशेवर प्रशिक्षण के माध्यम से हताहतों की संख्या को कम करना।
3. प्रशिक्षण (Training)
आपदा मित्रों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे आपदा के समय घबराएँ नहीं। उन्हें निम्नलिखित क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी जाती है:
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खोज और बचाव (Search and Rescue): मलबे या पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना।
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प्राथमिक चिकित्सा (First Aid): घायल लोगों को अस्पताल पहुँचाने से पहले बुनियादी इलाज देना।
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राहत शिविर प्रबंधन: विस्थापित लोगों के लिए खाने और रहने की व्यवस्था में मदद करना।
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संवाद: आपदा के समय सही जानकारी प्रशासन तक पहुँचाना।
4. आपदा मित्र किट (Protective Gear)
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, प्रत्येक स्वयंसेवक को एक ‘आपदा मित्र किट’ दी जाती है, जिसमें आवश्यक उपकरण होते हैं जैसे:
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लाइफ जैकेट और टॉर्च।
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फर्स्ट एड बॉक्स।
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हेलमेट और सुरक्षात्मक जूते।
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जरूरी उपकरण (जैसे रस्सी, सीटी आदि)।
5. पात्रता (Eligibility)
आपदा मित्र बनने के लिए आमतौर पर निम्नलिखित शर्तें होती हैं:
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व्यक्ति की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
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वह उसी जिले या क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।
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शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है।
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पूर्व सैनिकों, एनसीसी (NCC) कैडेटों और एनएसएस (NSS) स्वयंसेवकों को प्राथमिकता दी जाती है।
निष्कर्ष
आपदा मित्र किसी भी क्षेत्र के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ होते हैं। भारत जैसे विविध भूगोल वाले देश में, जहाँ कहीं बाढ़ तो कहीं भूकंप का खतरा रहता है, वहां ये स्वयंसेवक समाज की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं।
इसमें आवेदन कहा से करे ?
1. आवेदन कैसे करें? (How to Apply)
भारत में यह योजना राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के माध्यम से लागू की जाती है।
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ऑफलाइन तरीका: आप अपने जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) या कलेक्टर कार्यालय में स्थित आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management Cell) में जाकर संपर्क कर सकते हैं। वहां आपको एक फॉर्म भरना होगा।
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ऑनलाइन तरीका: कई राज्यों ने अपने आपदा प्रबंधन पोर्टल पर ‘Volunteer Registration’ का विकल्प दिया है। आप NDMA की आधिकारिक वेबसाइट ndma.gov.in पर जाकर अपने राज्य के लिंक को चेक कर सकते हैं।
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पंचायत/ब्लॉक स्तर: कभी-कभी स्थानीय तहसील या पंचायत कार्यालयों के माध्यम से भी स्वयंसेवकों का नामांकन किया जाता है।
2. आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
आवेदन के समय आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है:
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पहचान पत्र: आधार कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस।
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निवास प्रमाण पत्र: यह साबित करने के लिए कि आप उसी क्षेत्र/जिले के निवासी हैं।
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शैक्षिक योग्यता: कम से कम 8वीं या 10वीं पास (यह अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकता है)।
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मेडिकल सर्टिफिकेट: यह प्रमाणित करने के लिए कि आप शारीरिक रूप से फिट हैं।
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फोटो: हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज फोटो।
3. चयन प्रक्रिया (Selection Process)
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स्क्रीनिंग: आपके आवेदन की जांच की जाती है। उन लोगों को प्राथमिकता मिलती है जिनके पास पहले से अनुभव हो (जैसे NCC, NSS, या पूर्व सैनिक)।
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साक्षात्कार/शारीरिक जांच: कुछ मामलों में एक छोटा इंटरव्यू या फिटनेस टेस्ट लिया जा सकता है।
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प्रशिक्षण के लिए बुलावा: चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है।
4. प्रशिक्षण का विवरण (Training Details)
यह ट्रेनिंग पूरी तरह नि:शुल्क (Free) होती है।
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अवधि: आमतौर पर यह 12 से 15 दिनों का आवासीय प्रशिक्षण होता है।
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स्थान: यह प्रशिक्षण अक्सर राज्यों के सिविल डिफेंस संस्थानों या NDRF/SDRF के केंद्रों पर होता है।
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प्रमाण पत्र: ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने पर आपको भारत सरकार की ओर से एक सर्टिफिकेट, आईडी कार्ड और आपदा किट प्रदान की जाती है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
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यह एक स्वयंसेवी (Voluntary) पद है, यानी यह कोई नियमित सरकारी नौकरी नहीं है। हालांकि, प्रशिक्षण के दौरान रहना-खाना मुफ्त होता है और कभी-कभी कुछ राज्यों में आपदा के समय ड्यूटी करने पर मानदेय (Stipend) भी दिया जाता है।
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इसके माध्यम से आपको न केवल सेवा करने का मौका मिलता है, बल्कि आपके द्वारा सीखा गया कौशल आपके निजी जीवन में भी बहुत काम आता है।
- आपदा मित्र के बारे में सरकार क्या सोंचती है ?
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सरकार ‘आपदा मित्र’ को नियमित वेतन (Regular Salary) देने के बजाय स्वयंसेवी मॉडल (Volunteer Model) पर क्यों रखती है, इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण और सरकारी दृष्टिकोण नीचे दिए गए हैं:
1. “स्वयंसेवा” की मूल भावना (Spirit of Volunteering)
सरकार का मानना है कि आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। ‘आपदा मित्र’ का मुख्य उद्देश्य अपने ही पड़ोस और गांव की रक्षा करना है। सरकार इसे एक “परोपकारी सेवा” के रूप में देखती है, न कि एक पेशेवर नौकरी के रूप में। उनका तर्क है कि संकट के समय पैसे से ज्यादा “सेवा भाव” काम आता है।
2. वित्तीय बोझ (Financial Burden)
भारत में लाखों की संख्या में आपदा मित्र प्रशिक्षित किए जा रहे हैं।
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अगर सरकार इन सभी को नियमित वेतन देना शुरू करती है, तो बजट पर बहुत बड़ा स्थायी बोझ पड़ेगा।
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सरकार का ध्यान इस समय संसाधनों, आधुनिक उपकरणों (Drones, Sensors) और बुनियादी ढांचे (Infra) को मजबूत करने पर अधिक है।
3. कार्य की प्रकृति (Nature of Work)
आपदाएं हर समय नहीं आतीं।
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नियमित वेतन वाली नौकरियों में कर्मचारी को रोज 8-10 घंटे काम करना होता है।
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चूंकि आपदा मित्र की आवश्यकता केवल संकट या अभ्यास (Mock Drills) के समय होती है, इसलिए सरकार उन्हें “फुल-टाइम” कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने से बचती है।
4. प्रशासनिक जटिलताएँ (Administrative Issues)
यदि इन्हें नियमित कर्मचारी बनाया जाता है, तो उनके लिए पेंशन, पीएफ (PF), और अन्य भत्ते भी लागू होंगे। इससे चयन प्रक्रिया और भी कठिन हो जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर सामान्य नागरिकों को जोड़ना मुश्किल हो सकता है।
क्या सरकार कुछ और सोच रही है? (Current Benefits)
हालाँकि नियमित वेतन नहीं मिलता, लेकिन सरकार कुछ राहत और प्रोत्साहन जरूर देती है:
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मानदेय (Honorarium): कई राज्यों में आपदा के दौरान सक्रिय ड्यूटी पर तैनात होने पर दैनिक भत्ता या मानदेय दिया जाता है।
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बीमा (Insurance): आपदा मित्रों को ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में ₹5 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर दिया जाता है।
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वरीयता (Preference): पुलिस, होमगार्ड या अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती में आपदा मित्र के प्रमाण पत्र को प्राथमिकता दी जा सकती है।
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मुफ्त प्रशिक्षण और किट: ट्रेनिंग और सुरक्षा उपकरण सरकार मुफ्त प्रदान करती है।
भविष्य की संभावना
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को एक “हाइब्रिड मॉडल” अपनाना चाहिए, जहाँ आपदा मित्रों को कम से कम एक निश्चित रिटेनर फीस (Retainer Fee) या बेहतर प्रोत्साहन राशि दी जाए ताकि वे लंबे समय तक इस काम से जुड़े रहें।
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क्या भविष्य में वेतन मिल सकता है?
वर्तमान सरकारी नीति के अनुसार, इसे पूरी तरह से “वेतनभोगी नौकरी” बनाने की योजना नहीं है। लेकिन, NDMA इस बात पर चर्चा कर रहा है कि:
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आपदा मित्रों को ग्राम पंचायत के बजट से कुछ निश्चित मासिक प्रोत्साहन दिया जाए।
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उन्हें होमगार्ड की तर्ज पर ‘ऑन-कॉल’ भुगतान की गारंटी दी जाए
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